तीन दिनों में बिजासन सीमा से करीब 15 हजार श्रमिकों को बसों से पहुँचाया
अब दो लाख 26 हजार श्रमिक बस और 86 हजार ट्रेन से वापस लाये गये
जबलपुर
मध्यप्रदेश के लिये श्रमिकों को उनके स्थान तक पहुँचाने की चुनौती अन्य राज्यों की तुलना में थोड़ा अधिक है। एक ओर अन्य प्रदेशों में फँसे मध्यप्रदेश के श्रमिकों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुँचाना है, तो दूसरी ओर दूसरे प्रदेशों के श्रमिकों को जो मध्यप्रदेश से ट्रांजिट कर रहे हैं, उन्हे उनके राज्यों की सीमा तक पहुँचाना है। देश का हृदयप्रदेश होने के कारण महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान आदि राज्यों से उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखण्ड जाने वाले श्रमिक मध्यप्रदेश होकर गुजर रहे हैं। यह श्र पैदल यात्रा अथवा अन्य साधनों से मध्यप्रदेश की सीमा पर पहुँचते हैं। सबसे अधिक दबाब सेंधवा की सीमा पर बिजासन घाट पर है। वहां प्रतिदिन 5 से 6 हजार मजदूर पहुँच रहे हैं। इन श्रमिकों को भोजन, चिकित्सा परीक्षण के बाद नि:शुल्क बसों के माध्यम से देवास ट्रांजिट पर पहुँचाया जा रहा है। वहां से सागर, छतरपुर, गुना और शिवपुरी बसों से पहुँचाया जाता है। इन स्थानों से प्रदेश के दूसरे जिलो के श्रमिकों को उनके जिले में और उत्तरप्रदेश, झारखण्ड तथा बिहार के श्रमिकों को उत्तरप्रदेश की सीमा तक पहुँचाया जा रहा है। सेंधवा सीमा पर पिछले तीन दिनों में लगभग 15 हजार श्रमिकों को भोजन करवा कर उन्हें बसों के माध्यम से देवास होते हुए उनके गंतव्य की ओर भेजा गया है। श्रमिकों की संख्या काफी अधिक होने से बसों की संख्या और फेरे बढ़ाने की सतत कोशिशें की जा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रमिकों से अपील की है कि वे धैर्य रखें। उनको भोजन और चिकित्सा जांच के उपरांत बसों में नि:शुल्क पहुंचाया जाएगा। संकट की इस घड़ी में घबराये नहीं, मध्यप्रदेश सरकार एक-एक श्रमिक को घर पहुँचाएगी। मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलो में श्रमिकों के लिये भोजन, अस्थायी ठहरने, चिकित्सा जांच और बसों की व्यवस्था की गयी है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक आने वाले सभी श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचा नहीं दिया जाएगा। कुछ ऐसे मामले प्रकाश मे आ रहे हैं जहाँ मजबूरी में श्रमिक पैदल अथवा अन्य साधनों से यात्रा कर रहे हैं। ऐसे श्रमिकों से भी अपील है कि मध्यप्रदेश के जिस जिले में हो, वहां जिला प्रशासन तक पहुंचने अथवा खबर पहुँचाने की व्यवस्था करें। उनकी पूरी मदद की जाएगी। प्रदेश के अब तक 3 लाख 12 हजार 509 श्रमिक वापस आ चुके हैं।
सड़क परिवहन से दो लाख 26 हजार 803 श्रमिक वापस आये
अपर मुख्य सचिव एवं प्रभारी स्टेट कंट्रोल रूम श्री आई.सी.पी. केशरी ने जानकारी दी है कि सड़क परिवहन के माध्यम से 22 अप्रैल से 14 मई तक कुल दो लाख 26 हजार 803 श्रमिक वापस लाये गये। इनमें राजस्थान से 50 हजार 908, हरियाणा से 1329, गुजराज से एक लाख 29 हजार 431, उत्तरप्रदेश से 1936, महाराष्ट्र से 39 हजार 281, छत्तीसगढ़ से 3 हजार 865 और दमन एंव दीव से 53 श्रमिक लाये गये हैं।
विशेष श्रमिक ट्रेनों से 86 हजार श्रमिक वापस
श्री केशरी ने जानकारी दी है कि 14 मई तक 72 विशेष श्रमिक ट्रेनों से 86 हजार श्रमिक विभिन्न प्रदेशों से लाये गये हैं। उन्होंने बताया है कि दिल्ली से 1100, गोवा से 1200, गुजरात से 27,694, हरियाणा से 15025, कर्नाटक से 2270, केरल से 2251, महाराष्ट्र से 26,572, पंजाब से 2617 और तेलंगाना से 5777 श्रमिक वापस लाये जा चुके हैं। इसके अलावा अंतर्राज्यीय ट्रेन के माध्यम से 1200 लोग आये हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है। अब तक 90 ट्रेनों का रिक्विजिशन भेजा जा चुका है। 15 मई को 9 ट्रेन श्रमिकों को लेकर आयेंगी।
