पंजाब वासियों के लिए वेरका दूध के प्लास्टिक पैकेज जल्द ही गुजरे दौर की बात हो जाएंगे। पंजाब सरकार इस संबंध में विधानसभा के अगले सत्र तक नई नीति लाने जा रही है। यह बात सोमवार को पंजाब विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधायक अवतार सिंह जूनियर द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में कही।
अवतार जूनियर ने सदन में जानना चाहा था कि राज्य में वर्ष 2018-19 के दौरान कुल दूध का उत्पादन/प्रोसेसिंग कितनी हुई? इसके साथ ही, इस दूध की पैकिंग के लिए इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के लिफाफों की कुल संख्या कितनी रही। इसके जवाब में सहकारिता मंत्री ने सदन में बताया कि वर्ष 2018-19 के दौरान दूध के उत्पादन के आंकड़े डायरेक्टर पशु पालन विभाग पंजाब के पास उपलब्ध हैं।
डायरेक्टर पशु पालन के अनुसार, वर्ष 2018-19 के दौरान 125988.1 लाख लीटर दूध संगठित क्षेत्र में प्रोसेस किया गया था। इस अवधि में मिल्कफेड पंजाब ने 5991.76 लाख लीटर दूध की खरीद/प्रोसेसिंग की थी। सहकारिता मंत्री ने यह भी बताया कि मिल्कफेड में दूध की बिक्त्रस्ी और पैकिंग के लिए इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के लिफाफों की गिनती लगभग 80 करोड़ थी और इन्हें बनाने के लिए 1803.679 टन प्लास्टिक फिल्म का इस्तेमाल किया गया था।
इस पर जूनियर के पूरक प्रश्न में प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जिस तरह दिल्ली सरकार ने दूध की सप्लाई के लिए डिस्पेंसिंग यूनिट स्थापित किए हैं, क्या पंजाब सरकार प्लास्टिक का इस्तेमाल खत्म करने के लिए कोई ऐसी ही योजना ला रही है? इस पर रंधावा ने बताया कि इस संबंध में एक पॉलिसी सरकार के विचाराधीन है, जिसे संभवत: विधानसभा के अगले सत्र तक पेश कर दिया जाएगा।
अवतार जूनियर ने सदन में जानना चाहा था कि राज्य में वर्ष 2018-19 के दौरान कुल दूध का उत्पादन/प्रोसेसिंग कितनी हुई? इसके साथ ही, इस दूध की पैकिंग के लिए इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के लिफाफों की कुल संख्या कितनी रही। इसके जवाब में सहकारिता मंत्री ने सदन में बताया कि वर्ष 2018-19 के दौरान दूध के उत्पादन के आंकड़े डायरेक्टर पशु पालन विभाग पंजाब के पास उपलब्ध हैं।
डायरेक्टर पशु पालन के अनुसार, वर्ष 2018-19 के दौरान 125988.1 लाख लीटर दूध संगठित क्षेत्र में प्रोसेस किया गया था। इस अवधि में मिल्कफेड पंजाब ने 5991.76 लाख लीटर दूध की खरीद/प्रोसेसिंग की थी। सहकारिता मंत्री ने यह भी बताया कि मिल्कफेड में दूध की बिक्त्रस्ी और पैकिंग के लिए इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के लिफाफों की गिनती लगभग 80 करोड़ थी और इन्हें बनाने के लिए 1803.679 टन प्लास्टिक फिल्म का इस्तेमाल किया गया था।
इस पर जूनियर के पूरक प्रश्न में प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण का जिक्र करते हुए सवाल किया कि जिस तरह दिल्ली सरकार ने दूध की सप्लाई के लिए डिस्पेंसिंग यूनिट स्थापित किए हैं, क्या पंजाब सरकार प्लास्टिक का इस्तेमाल खत्म करने के लिए कोई ऐसी ही योजना ला रही है? इस पर रंधावा ने बताया कि इस संबंध में एक पॉलिसी सरकार के विचाराधीन है, जिसे संभवत: विधानसभा के अगले सत्र तक पेश कर दिया जाएगा।
धान की फसल खराब पर सरकार का मुआवजे से इंकार
प्रश्नकाल के दौरान ही अकाली दल के विधायक हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा की ओर से मुख्यमंत्री से सवाल किया गया कि राज्य के कई किसानों द्वारा पराली को खेत में मिला दिए जाने के कारण वहां सुंडियां पैदा हो गई हैं, जिसने खेत में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने किसानों की फसल को हुए नुकसान के लिए सरकार के पूछा कि क्या राज्य सरकार ऐसे प्रभावित किसानों को मुआवजा देगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को फसल लगाने व देखभाल करने में प्रति एकड़ 10 हजार रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है, इसलिए सरकार किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपये का मुआवजा दे।
मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में इस सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि सरकार का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है लेकिन पराली के मामले में किसानों को मुआवजा देने के लिए पंजाब सरकार केंद्र से बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक करके इस मसले का हल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में इस सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि सरकार का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है लेकिन पराली के मामले में किसानों को मुआवजा देने के लिए पंजाब सरकार केंद्र से बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक करके इस मसले का हल किया जाएगा।
पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप के 1374.76 करोड़ केंद्र पर बकाया
चंडीगढ़ पंजाब विधानसभा में सोमवार को सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री साधू सिंह धर्मसोत ने बताया कि एससी-एसटी विद्यार्थियों को पोस्ट मैर्टिक स्कालरशिप स्कीम के तहत भारत सरकार द्वारा 303.92 करोड़ रुपये की राशि वर्ष 2018-19 के अंत में दी गई थी, जिसे वर्ष 2019-20 में खर्च के बाद उसका सर्टिफिकेट भारत सरकार को भेजा जा चुका है।
इसके अलावा पंजाब में एससी विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप देने के लिए वर्ष 2016-17 से वर्ष 2018-19 तक 1374.76 करोड़ रुपये की राशि की जरूरत है, जिसकी मांग भारत सरकार से की गई है। जैसे ही यह राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होगी, इसे विद्यार्थियों को दे दिया जाएगा। धर्मसोत सदन में आप विधायक गुरमीत सिंह मीत हेयर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए राज्य के एससी-एसटी विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप न मिलने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि स्कालरशिप की राशि काफी लंबे समय से बकाया है, जिस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है और कालेजों ने इन विद्यार्थियों के रिजल्ट रोक रखे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एससी-एसटी विद्यार्थियों को कालेजों द्वारा दाखिले भी नहीं दिए जा रहे हैं। इस पर धर्मसोत ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी कालेजों को इस संबंध में हिदायतें जारी की हुई हैं और एससी-एसटी विद्यार्थियों का दाखिला या सर्टिफिकेट नहीं रोके जा सकते।
इसके अलावा पंजाब में एससी विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप देने के लिए वर्ष 2016-17 से वर्ष 2018-19 तक 1374.76 करोड़ रुपये की राशि की जरूरत है, जिसकी मांग भारत सरकार से की गई है। जैसे ही यह राशि केंद्र सरकार से प्राप्त होगी, इसे विद्यार्थियों को दे दिया जाएगा। धर्मसोत सदन में आप विधायक गुरमीत सिंह मीत हेयर ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए राज्य के एससी-एसटी विद्यार्थियों को पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप न मिलने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि स्कालरशिप की राशि काफी लंबे समय से बकाया है, जिस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है और कालेजों ने इन विद्यार्थियों के रिजल्ट रोक रखे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि एससी-एसटी विद्यार्थियों को कालेजों द्वारा दाखिले भी नहीं दिए जा रहे हैं। इस पर धर्मसोत ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी कालेजों को इस संबंध में हिदायतें जारी की हुई हैं और एससी-एसटी विद्यार्थियों का दाखिला या सर्टिफिकेट नहीं रोके जा सकते।
मिशन तंदरुस्त पंजाब के तहत रोकी जा रही मिलावटखोरी
अकाली दल के विधायक हरिंदर पाल सिंह चंदू माजरा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए सदन का ध्यान प्रदेश में खाने-पीने की वस्तुओं- दूध, दही, पनीर, मिठाईयों, दालों, फल-सब्जियों में कैमिकल की मिलावट की ओर दिलाया। उन्होंने कहा कि इस मिलावटखोरी से प्रदेश के लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है और लोगों में कैंसर जैसे जानलेवा रोग बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने इस मामले में गंभीरता से सख्त कार्यवाही की मांग की।
उन्होंने कहा कि सूबे में पहले 75 लाख पशु थे, जो अब 65 लाख पशु रह गए हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ता जा रहा है, जिसके आंकड़े पशु पालन विभाग ने सार्वजनिक किए हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू ने सदन में कहा कि मिलावट रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की फूड सेफ्टी विंग की टीमों द्वारा लगातार ऐसे मिलावटखोरों पर नजर रखी जा रही है। मंत्री ने सैंपलिंग की जाती है।
अगर कोई भी मिलावट करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत कार्यवाही की जा रहीहै। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 के दौरान खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए क्त्रस्मश: 10366, 12536 और 8697 सेंपल लिए गए थे। इनमें से क्त्रस्मश: 141, 136 और 71 सेंपल असुरक्षित पाए गए थे, जिसके लिए 2017 में 1.39 करोड़, 2018 में 1.25 करोड़ और 2018 में 3.30 करोड़ रुपये जुर्माना राशि वसूली गई थी।
उन्होंने कहा कि सूबे में पहले 75 लाख पशु थे, जो अब 65 लाख पशु रह गए हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ता जा रहा है, जिसके आंकड़े पशु पालन विभाग ने सार्वजनिक किए हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिद्धू ने सदन में कहा कि मिलावट रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की फूड सेफ्टी विंग की टीमों द्वारा लगातार ऐसे मिलावटखोरों पर नजर रखी जा रही है। मंत्री ने सैंपलिंग की जाती है।
अगर कोई भी मिलावट करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के तहत कार्यवाही की जा रहीहै। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017, 2018 और 2019 के दौरान खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए क्त्रस्मश: 10366, 12536 और 8697 सेंपल लिए गए थे। इनमें से क्त्रस्मश: 141, 136 और 71 सेंपल असुरक्षित पाए गए थे, जिसके लिए 2017 में 1.39 करोड़, 2018 में 1.25 करोड़ और 2018 में 3.30 करोड़ रुपये जुर्माना राशि वसूली गई थी।
कैंबल-बे टापू का नाम पंजाब टापू रखा जाए
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान काले पानी की सजा के लिए अंडमान-निकोबार की जेल में ले जाए गए पंजाबी बहादुरों की याद में पंजाब सरकार एक शहीद गैलरी की स्थापना करे और अंडमान प्रशासन से तालमेल कर कैंबल-बे टापू का नाम पंजाब टापू रखा जाए। यह सिफारिशें पंजाब विधानसभा में सोमवार को माननीय सदस्यों की उस कमेटी ने पेश की, जिसका गठन विधानसभा के स्पीकर ने 26 दिसंबर, 2018 को, पंजाबियों द्वारा स्वंत्रता संग्राम के लिए अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में दी शहादत के बारे में तथ्यों पर आधारित रिपोर्ट तैयार करने के लिए किया था।
कमेटी के अध्यक्ष हरप्रताप सिंह अजनाला ने सदन में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि कमेटी ने अंडमान निकोबार दीप समूह का दौरा करके वहां गुरुद्वारा कमेटी और अन्य संस्थाओं और व्यक्तियों से मुलाकात की। कमेटी ने पाया कि इस दीप समूह पर पंजाब के स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी गिनती में भेजा गया था यहां भेजे गए पंजाबियों का आजादी की लहर में बहुत बड़ा योगदान रहा है लेकिन इस योगदान का सेलुलर जेल में दिखाए जाने वाले लाइट एंड साउंड प्रोग्राम में ज्यादा वर्णन नहीं किया गया है। इसके अलावा किसी चौक सड़क या किसी टापू का नाम भी पंजाबियों की से संबंधित नहीं है। कमेटी ने पाया कि इस द्वीप समूह पर पंजाबी काफी मात्रा में रहते हैं लेकिन उनके प्रति सरकार का व्यवहार अपनत्व वाला नहीं है।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पंजाब सरकार से सिफारिश की कि अंडमान निकोबार दीप समूह पर भेजे गए पंजाबी स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में एक लाइट एंड साउंड लेजर शो कार्यक्त्रस्म तैयार किया जाए और इस शो को जंग-ए-आजादी मेमोरियल करतारपुर में अलग जगह अलाट की जाए। सिफारिश में यह भी कहा गया कि लेजर शो में इन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम उनका जीवन परिचय और फोटो दिखाए जाएं। इसके साथ ही कमेटी ने इन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में एक शहीद गैलरी की स्थापना की सिफारिश भी की है। इसके तहत प्रत्येक स्वतंत्रता सेनानी की फोटो के नीचे उसका नाम और पूरा पता वाह संक्षिप्त जीवन परिचय लिखा जाए ताकि मौजूदा और आने वाली पीढ़ी इन बहादुर नायकों के बारे में जान सके। कमेटी ने यह भी सिफारिश की कि पंजाब सरकार इन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में अंडमान निकोबार दीप समूह के प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर इन शहीदों की प्रतिमाएं सेल्यूलर जेल के बाहर लगवाए।
कमेटी के अध्यक्ष हरप्रताप सिंह अजनाला ने सदन में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि कमेटी ने अंडमान निकोबार दीप समूह का दौरा करके वहां गुरुद्वारा कमेटी और अन्य संस्थाओं और व्यक्तियों से मुलाकात की। कमेटी ने पाया कि इस दीप समूह पर पंजाब के स्वतंत्रता सेनानियों को बड़ी गिनती में भेजा गया था यहां भेजे गए पंजाबियों का आजादी की लहर में बहुत बड़ा योगदान रहा है लेकिन इस योगदान का सेलुलर जेल में दिखाए जाने वाले लाइट एंड साउंड प्रोग्राम में ज्यादा वर्णन नहीं किया गया है। इसके अलावा किसी चौक सड़क या किसी टापू का नाम भी पंजाबियों की से संबंधित नहीं है। कमेटी ने पाया कि इस द्वीप समूह पर पंजाबी काफी मात्रा में रहते हैं लेकिन उनके प्रति सरकार का व्यवहार अपनत्व वाला नहीं है।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पंजाब सरकार से सिफारिश की कि अंडमान निकोबार दीप समूह पर भेजे गए पंजाबी स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में एक लाइट एंड साउंड लेजर शो कार्यक्त्रस्म तैयार किया जाए और इस शो को जंग-ए-आजादी मेमोरियल करतारपुर में अलग जगह अलाट की जाए। सिफारिश में यह भी कहा गया कि लेजर शो में इन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम उनका जीवन परिचय और फोटो दिखाए जाएं। इसके साथ ही कमेटी ने इन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में एक शहीद गैलरी की स्थापना की सिफारिश भी की है। इसके तहत प्रत्येक स्वतंत्रता सेनानी की फोटो के नीचे उसका नाम और पूरा पता वाह संक्षिप्त जीवन परिचय लिखा जाए ताकि मौजूदा और आने वाली पीढ़ी इन बहादुर नायकों के बारे में जान सके। कमेटी ने यह भी सिफारिश की कि पंजाब सरकार इन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में अंडमान निकोबार दीप समूह के प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर इन शहीदों की प्रतिमाएं सेल्यूलर जेल के बाहर लगवाए।
दलबदल संबंधी अयोग्यता बिल सदन के विचार के लिए रुका
पंजाब विधानसभा में सोमवार को सचिव द्वारा पंजाब विधानसभा (दल बदल के आधार पर सदस्यों की अयोग्यता) नियम 2020 पेश किया गया। इस बिल में कहा गया कि यह नियम जोकि भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 8 द्वारा प्रदान की गई शक्तियों का प्रयोग करते हुए पंजाब विधानसभा के स्पीकर द्वारा फ्रेम किए गए हैं।
लेकिन संसदीय मामलों के मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने इस बिल पर स्पीकर से आग्रह किया कि इसे सदन के सदस्यों द्वारा अध्ययन के लिए फिलहाल सदन पटल में रहने दिया जाए, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। इस तरह सोमवार को इस बिल पर बहस नहीं हो सकी। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी से बगावत कर चुके छह विधायक इस बिल के दायरे में आते हैं। बिल को मंजूरी मिलते ही इन बागी विधायकों की सदस्यता खारिज हो जाएगी।
दिल्ली हिंसा पर आप के निंदा प्रस्ताव को नहीं मिली इजाजत
दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर आम आदमी पार्टी पंजाब द्वारा सोमवार को विधानसभा में लाए गए निंदा प्रस्ताव को सदन में रखने की इजाजत नहीं मिली। विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने दिल्ली में हुए दंगे और जान-माल के नुकसाल का हवाला देते हुए गोड़सेवादी ताकतों के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव सदन में रखने का आग्रह किया लेकिन डिप्टी स्पीकर अजायब सिंह भट्टी ने 15 दिन की शर्त का हवाला देते हुए इसकी मंजूरी नहीं दी। हालांकि इस दौरान सभी आप विधायक अपने बैंचों पर खड़े होकर डिप्टी स्पीकर से इजाजत दिए जाने की मांग करते रहे।
लेकिन संसदीय मामलों के मंत्री ब्रह्म मोहिंदरा ने इस बिल पर स्पीकर से आग्रह किया कि इसे सदन के सदस्यों द्वारा अध्ययन के लिए फिलहाल सदन पटल में रहने दिया जाए, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया। इस तरह सोमवार को इस बिल पर बहस नहीं हो सकी। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी से बगावत कर चुके छह विधायक इस बिल के दायरे में आते हैं। बिल को मंजूरी मिलते ही इन बागी विधायकों की सदस्यता खारिज हो जाएगी।
दिल्ली हिंसा पर आप के निंदा प्रस्ताव को नहीं मिली इजाजत
दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर आम आदमी पार्टी पंजाब द्वारा सोमवार को विधानसभा में लाए गए निंदा प्रस्ताव को सदन में रखने की इजाजत नहीं मिली। विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने दिल्ली में हुए दंगे और जान-माल के नुकसाल का हवाला देते हुए गोड़सेवादी ताकतों के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव सदन में रखने का आग्रह किया लेकिन डिप्टी स्पीकर अजायब सिंह भट्टी ने 15 दिन की शर्त का हवाला देते हुए इसकी मंजूरी नहीं दी। हालांकि इस दौरान सभी आप विधायक अपने बैंचों पर खड़े होकर डिप्टी स्पीकर से इजाजत दिए जाने की मांग करते रहे।
पंजाबी में कामकाज अनिवार्य बनाया जाए
पंजाब के तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण, पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले और रोजगार सृजन मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने सोमवार को पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया कि राज्य सरकार के सभी संस्थाओं में पंजाबी में कामकाज अनिवार्य बनाया जाए। इसके साथ ही अदालतों का कामकाज भी पंजाबी में किया जाए।
उन्होंने प्रस्ताव पेश किया कि सभी सरकारी और ग़ैर-सरकारी शैक्षिक संस्थाओं में पंजाबी भाषा को दसवीं कक्षा तक ज़रूरी विषय के तौर पर पढ़ाने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएँ। इसके साथ ही, उन्होंने प्रस्ताव किया कि राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार के विरुद्ध किये जाने वाले कार्यों को रोकने के लिए ज़रुरी कानून बनाए। सदन में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया।
इस मौके पर सदन में चन्नी ने कहा कि 150 देशों में पंजाबी बोली जाती है। उन्होंने यूएनओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर की 7000 भाषाओं में से पंजाबी को 12वां स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में अगले 50 सालों के दौरान 2000 भाषाओं का ख़त्म होने का अंदेशा ज़ाहिर किया गया है, जिनमें से पंजाबी भी एक है।
उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता भी ज़ाहिर की कि पंजाब के स्कूलों में पंजाबी बोलने वाले बच्चों को जुर्माना किया जाता है और दूसरी भाषाओं को प्राथमिकता दी जाती है, जिसे रोकने की सख्त ज़रूरत है। उन्होंने मांग की कि पंजाबी को मान-सत्कार दिए जाने और सख्ती से पंजाबी भाषा लागू करने के लिए एक अलग आयोग बनाया जाए ताकि पंजाबी में काम न करने वालों और विरुद्ध काम करने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्यवाही की जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सरकारी संस्थाओं में अफसरों और बाकी मुलाज़िमों के लिए पंजाबी में काम करना लाज़िमी बनाया जाए। चन्नी ने पंजाब विधानसभा की सारी कार्यवाही पंजाबी में यकीनी बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर देते हुए कहा कि विधानसभा के सभी नियम पंजाबी में होने चाहिए।
उन्होंने प्रस्ताव पेश किया कि सभी सरकारी और ग़ैर-सरकारी शैक्षिक संस्थाओं में पंजाबी भाषा को दसवीं कक्षा तक ज़रूरी विषय के तौर पर पढ़ाने के लिए ज़रूरी कदम उठाए जाएँ। इसके साथ ही, उन्होंने प्रस्ताव किया कि राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार के विरुद्ध किये जाने वाले कार्यों को रोकने के लिए ज़रुरी कानून बनाए। सदन में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो गया।
इस मौके पर सदन में चन्नी ने कहा कि 150 देशों में पंजाबी बोली जाती है। उन्होंने यूएनओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया भर की 7000 भाषाओं में से पंजाबी को 12वां स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट में अगले 50 सालों के दौरान 2000 भाषाओं का ख़त्म होने का अंदेशा ज़ाहिर किया गया है, जिनमें से पंजाबी भी एक है।
उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता भी ज़ाहिर की कि पंजाब के स्कूलों में पंजाबी बोलने वाले बच्चों को जुर्माना किया जाता है और दूसरी भाषाओं को प्राथमिकता दी जाती है, जिसे रोकने की सख्त ज़रूरत है। उन्होंने मांग की कि पंजाबी को मान-सत्कार दिए जाने और सख्ती से पंजाबी भाषा लागू करने के लिए एक अलग आयोग बनाया जाए ताकि पंजाबी में काम न करने वालों और विरुद्ध काम करने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्यवाही की जा सके।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सरकारी संस्थाओं में अफसरों और बाकी मुलाज़िमों के लिए पंजाबी में काम करना लाज़िमी बनाया जाए। चन्नी ने पंजाब विधानसभा की सारी कार्यवाही पंजाबी में यकीनी बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर देते हुए कहा कि विधानसभा के सभी नियम पंजाबी में होने चाहिए।